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मशहद-ए-हिंद, जिसे पीढ़ियों से पंज पीर मज़ार के नाम से जाना जाता है, पंजाब के प्राचीन क़स्बे समाना में स्थित है। इसे इमामज़ादा सैयद मशहद अली की आरामगाह माना जाता है, जो हज़रत मुहम्मद साहब (सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही व सल्लम) के ख़ानदान से संबंध रखते हैं। विभिन्न धर्मों के श्रद्धालु यहाँ श्रद्धा और दुआ के लिए आते हैं।
रौज़े से मिले एक फ़ारसी शिलालेख के अनुसार इस इमारत का निर्माण रमज़ान के महीने, 967 हिजरी में, बादशाह अकबर के शासन के चौथे वर्ष में हुआ।
समाचार
इतिहास
समाना क़स्बा, रौज़ा और उसका शिलालेख।
समय
रौज़ा कब खुला रहता है, और नमाज़ के समय।
कार्यक्रम
साल भर की मजलिसें और अवसर।
संपर्क
रौज़े की कमेटी से संपर्क।
स्थान
समाना का नक्शा और रास्ता।


